पांच पांडवों की पत्नी होने के बावजदू भी द्रौपदी नहीं कर पाई यह काम, जो हर स्त्री करती हैं

कहते है की इतिहास को जितना आप पढोगे वो उतना ही गहरा होता जाएगा. अगर हिन्दू धर्म की मान्यताओं पर नजर डाली जाए तो वो सब यहाँ बताया गया है जो आज विज्ञान खोज रहा है और खोजकर यही कहता है की जो हिन्दू धर्म में लिखा हुआ है वो एक दम सत्य हैं. कहते है की पूरी दुनिया में अगर कोई सबसे ज्यादा माना जाने वाला धर्म है तो वो है हिन्दू धर्म तो आज हम आपको हिन्दू धर्म के ही एक ऐसे रहस्य को आपके सामने लाने वाला हूँ. आज मैं इस पोस्ट में आपको महाभारत के बारें में कुछ ऐसी ही बातें बताने वाले हौं जिन्हें आप शायद ही नहीं जानते होंगे. कहते है की महाभारत में सब कुछ बताया गया है पर बहुत बार ऐसी चीजें छुपा दी जाती है जिन्हें दिखाना बहुत जरूरी होता है पर आज कल के टीवी शो निर्माता सिर्फ धर्म की धज्जियां उड़ाना जानते है ना की धर्म की असलियत बताना.

द्रौपदी को मिला था स्वंयवर चुनने का मौका

हालाँकि उस काल में स्त्रियों पर बहुत सी बातों की रोक टोक थी पर द्रौपदी के पिता ने उसे स्वयंवर चुनने का अवसर दिया था. हालाँकि वो हर बार उसे एक अनचाही लड़की होने का भी परिचय देते रहते थे. पर कहते है ना की जिसके भाग्य में जो लिखा होता है वो ही मिलता है.

शादी के लिए रखी थी यह शर्त

कहते है की द्रौपदी के पिता ने स्वंयवर चुनने के साथ साथ एक शर्त भी रखी थी की जो राजा पानी में मछली की परछाई देखकर मछली की आँख पर वार करेगा उसे उसकी बेटी का वर बना दिया जाएगा.

अर्जुन को किया पसंद

कहा जाता है की जब अर्जुन को दरबार में देख कुछ लोगों ने उनका उपहास भी उड़ाया था. बोले की ऐसे लोग भी आ जाते है जिनके शरीर पर एक भी स्वर्ण की चीज नहीं है. क्योंकि उस वक्त अर्जुन के पास कुछ भी नहीं था वो राज्य त्याग कर जंगल में रहने लग गये थे. और अर्जुन ने दरबार में आकर मछली की आँख पर निशाना लगा दिया और द्रौपदी के पिता ने द्रौपदी की शादी उसके साथ कर दी.

घर गये माँ ने कहा ऐसा

जब अर्जुन द्रौपदी को अपने भाइयों के साथ घर लेकर गये तब उनकी माँ खाना बना रही थी. उस वक्त अर्जुन ने कहा की माँ देखो हम क्या लेकर आये हैं. माँ ने बिना देखे कह दिया की बेटा जो भी लाये हो पांचो भाई आपस में बाँट लो, अब माँ के वचन को गलत ना जाने देने के लिए उन पांचो भाइयों ने निर्णय लिया की वो पांचो द्रौपदी के साथ शादी करेंगे. और उन्होंने वैसा ही किया.

वेद व्यास ने बताया रास्ता

द्रौपदी को जब कहा गया की पांचो भाइयों से शादी करनी पड़ेगी तो उसने मना किया और वेद व्यास जी से इसका हल माँगा. तब वेदव्यास जी ने कहा की द्रौपदी को हर साल अलग अलग भाई के पास रहना पड़ेगा. ऐसे में सभी भाइयों ने हाँ की और ऐसा ही हुआ. इसी बिच सभी भाइयों ने अपनी अलग अलग शादी भी कर ली. इस सब के बिच में अगर कोई सच्चे प्यार के लिए तरसती रही तो वो सिर्फ द्रौपदी थी.

पांड्वो ने दिया था पत्नी का दर्जा

हालांकि सभी पांड्वो ने द्रौपदी को पत्नी का दर्जा दिया था पर आज भी कहा जाता है की द्रौपदी को बचपन में ही पता चल गया था की उसके पांच पति होंगे पर उसने इस बात को यह कहकर नकार दिया था की पांच पति होने वाली स्त्री कोई योग्य स्त्री नहीं कहता है और ऐसा मेरे साथ कभी हो भी नहीं सकता क्योंकि मेरे पिताजी ऐसा नही होने देंगे मेरे साथ. पर होनी को कौन टाल सकता है.