सुपर 30 फेम आनंद का सोशल मीडिया पर कसा जा रहा तंज

शिक्षक शब्द सुनते ही हमारे जहन में एक आदर का भाव उत्पन्न हो जाता हैं और होना भी चाहिए हमारी सभ्यता एवं संस्कृति भी हमें यही सिखाया हैं। ‘माता पिता और गुरु का आदर करना’।

आजकल शिक्षा एक व्यवसाय बन चूका हैं और शिक्षक का मतलब सिर्फ व्यवसायी। इस पेशे में ये भी जरुरी नहीं की अपने विद्यार्थीयों को संतुष्ट कर पैसा कमाया जाये, आजकल के शिक्षक बच्चे को ठग के पैसा कमाने से भी नहीं हिचकते।

और कुछ अच्छे शिक्षक हैं भी तो वो अपने आप को इस सांसारिक माया में लिप्त कर अपना स्तर काफी गिरा चुके है। उनके अंदर की इंसानियत दिखावे की दुनिया मे खो चुकी है। समस्या यह है इस भागती हुई ज़िंदगी मे वक़्त किसी के पास नही है और सपने हर किसी के पास है, बस उसी सपने की फसल काटते है ऐसे शिक्षक वर्ग। आधा सच आधे झूठ के साथ समाज को पता चलता है और यही ऐसे शिक्षकों के छवि का निर्धारण करता है।

From the wall of Abhayanand ji

सोशल मीडिया, लोकल मीडिया के माध्यम से होता हुआ उनका राज्य स्तरीय गुणगान पूरे देश के बाद तो अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुच चुका है। जी हाँ मेरा इशारा तो आप समझ ही गए होंगे मैं बात कर रहा हूँ सुपर 30 के संचालक और गणितज्ञ ‘आनंद कुमार’ की। वो आज पूरी दुनिया मे सुपर-30 का श्रेय खुद ले रहे है जबकि यह एक अकेले व्यक्ति की सफलता हो ही नही सकती, सिर्फ गणित ही एक विषय नही होता IIT में, भौतिकी एवम रसायनशास्त्र के शिक्षक भी होंगे उस टीम में और छात्रों की भी भागीदारी होती है। यह सफलता शिक्षकों और छात्रों के आपसी सामंजस्य से ही आ सकता है, किन्तु हमारे महामहिम आनंद जी ने यह श्रेय अपने अलावे कभी किसी और को नही दिया। हाल ही में सोशल मीडिया में उनपे बनने वाली फिल्म की चर्चा सुनी, एक बिहारी होने के कारण मुझे भी अच्छा लगा किन्तु यदि यह पूर्ण सच होता तो आंतरिक खुशी मिलती।

Anand Getting trolled on social media

आज एक वीडियो देखने (watch nowको मिला जिस से की आनंद जी की अवसरवादी मानसिकता का पता चला, यह वीडियो रिलायंस फाउंडेशन की तरफ से देश के रियल हीरोज को सम्मानित किया जा रहा है। इस वीडियो में सुपर 30 के तरफ से अभयानंद और आनंद दोनो ही पुरस्कार ग्रहण कर रहे है। पुरस्कृत होने के बाद जहाँ आनंद अपनी अवसरवादी मानसिकता दिखाते हुए धीरूभाई अंबानी को अपना रोल मॉडल बताते हुए कहा कि उनकी बिज़नेस करने का तरीका उन्हें पसंद है। एक शिक्षक का आदर्श एक व्यवसायी? वैसे सही भी है क्योंकि आनंद जी भी है तो बिज़नेस मैन ही, फर्क सिर्फ इतना है कि धीरूभाई अंबानी पैसा कमा कर सफल हुए जबकि आनंद सफल हो कर पैसे बना रहे है। जबकि वहीं अभयानंद जी ने कहा कि यह समाज सेवा नही बल्कि निष्ठा और सामाजिक विवशता है।

सुपर 30 की बुनियाद के दो अहम आधार स्तंभ थे, किन्तु आनंद ने आज तक किसी को भी श्रेय नही दिया जबकि बिहारवासी जानते है कि किस प्रकार अभयानंद जी अपनी कार्यावधि के बाद भी घर-परिवार को दरकिनार करते हुए छत्रों को पढ़ाते थे, यह जुनून ही ही सकता है और कुछ नही।

Anand Getting trolled on social media

आज तक यह समझ नही आया कि आंनद भारत और संपूर्ण विश्व के भ्रमण में रहते है तो छात्रों को पढ़ाता कौन है? क्यो नहीं आज तक उन्होंने अपने छात्रों की सूची जारी की? सुपर 30 के कितने छात्रों का किन-किन IIT में एडमिशन हुआ? कितने छात्र SC/ST कैटेगिरी के थे? उनकी टीम में और कौन-कौन से शिक्षक सहयोग कर रहे है? क्या उनकी मेहनत दुनिया के सामने नही आनी चाहिए? है कोई जो इन सवालों को पूछ आनंद से पूछ सके? क्या आनंद इन सवालों के जवाब देँगे? क्या सच मे जवाब है उनके पास?

सम्पूर्ण बिहार सहित भारत उनको गणितज्ञ के रूप में सम्मान देता है और वो है कि बस अपने नाम को अमर करने की बजाय कुछ पल के नायक बनने में लगे हुए है।

आपके लिए रिलायंस फाउंडेशन के रियल हीरोज का वीडियो का लिंक नीचे संलग्न है, कृप्या उसे देखे। View Video