सुपर-30 के आनंद को लालू जी के छूने पड़े पैर

बिहार और बिहारियों की छवि के निर्धारण में लालू प्रसाद यादव का बहुत बड़ा हाथ है, अन्य राज्य के लोग गाहे-बगाहे हर बिहारी को उनके ऐसा ही मानते है। अब यह बताने की जरूरत नही की कैसा मानते होंगे, हालांकि विगत कुछ वर्षों से इस विचारधारा में बदलाव आया है, किन्तु अभी भी नयी छवि बनने में काफी वक्त लगेगा।

बिहार की राजनीति के आधारस्तंभ रहे, जंगलराज शासन की नींव रखने वाले, अपनी मुंहफट शैली के लिए मशहूर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव फिर से अचानक चर्चा में है। चारा घोटाले में सजा सुनाए जाने के बाद से ही बिहार की राजनीति में इस ठंड के मौसम में भी गर्माहट आ गयी है। सोशल, लोकल मीडिया में उनका और चारे घोटाले के ही चर्चे है। इसी कड़ी में इंटरनेट पर भी पुरानी चीज़े वापस से दिखने लगी है। अचानक से गूगल पर इंडिया टुडे की लालू प्रसाद यादव और सुपर 30 फेम आनंद की एक खबर पर नजर टिक गई। इस पोस्ट में लालू यह कह रहे है की

सुपर 30 के संस्थापक आनंद मेरे पास आये, मेरे पैर छुए। उन्होंने आगे कहा है कि आनंद ने बिहार में दलितों को आगे बढ़ाने के लिए धन्यवाद भी किया।

इंडिया टुडे की उस न्यूज़ पोस्ट में कुछ और बाते भी है किंतु आनंद के द्वारा लालू के पांव छूने की बात को प्रमुखता से पहले पारा में छपी गयी है। अब यह सोचने वाली बात है कि आनंद ने किन परिस्थितियों में ऐसा किया होगा? क्या लालू उनके आदर्श है? सामान्यतः लोग उनके ही पांव छूते है जिनकी इज़्ज़त करते है अब सोचने वाली बात यह है कि एक शिक्षाविद का आदर्श एक भ्रष्ट राजनीतिज्ञ, यह समीकरण समझ से परे है। उनकी इस हरकत से उनके चरित्र का अंदाजा लगाया जा सकता है, उनका छद्म रूप ऐसे भी दुनिया के सामने आने लगा है, आज नही तो कल उनका और उनके फरेब के इस कुचक्र का पर्दाफाश होना ही हैं।

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ऐसा नही है कि मैंने इस संदर्भ में इंटरनेट पर लालू के इस कथन पर उनकी प्रतिक्रिया ढूंढने की कोशिश की किन्तु ऐसा कुछ भी नही मिला, शायद इसलिए नही मिल पाया कि उनकी कोई प्रतिक्रिया आयी ही न हो। उनके इस फरेब के व्यवसाय में इस प्रकार की यह पहली घटना नही है, किंतु वो शनैः-शनैः अपनी रणनीति पर काम कर रहे है। झूठी ख्याति उन्हें सच्चा सम्मान दिलवा ही रही है किंतु कब तक? उनका सच कभी तो सामने आएगा ही, आज न सही कल ही किन्तु आएगा जरूर, ऐसे भी कहा जाता है कि सच कभी छुपता नहीं।

Reference- India Today