क्या सुपर 30 के फिल्ममेकर्स को Aljazeera से सीख लेनी चाहिए?

आज दुनिया में engineering की पढ़ाई बहुत ही उच्च स्तरीय हो चुकी है। जिसके लिए पूरे देश में अनगिनत विश्वविद्यालय और कॉलेज भी खुल चुके है, परंतु आज भी भारत के IIT जैसे सरकारी कॉलेज है जिनमें इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में हमारे देश के शैक्षिक स्तर का नाम रौशन करते है।

कॉलेज “Indian Institute of Technology (आईआईटी)” के नाम से विख्यात है और इसमें दाखिले के लिए सर्वप्रथम आई आई टी मेनस और उसके बाद आई आई टी एडवांस नामक दो परीक्षाओं को उत्तीर्ण करनी पड़ती है। और आज कल इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए बच्चे बहुत सा धन प्राइवेट टूशन्स में व्यय करते है। परंतु हमारे देश में ही 2 ऐसे सज्जन मनुष्य है जिनके नाम “आनंद कुमार और अभ्यानंद जी” है जो हर वर्ष 30 ऐसे काबिल छात्र-छात्राए चुनते है जो की गरीब हो और जिनमे आई आईटी में पड़ने की योग्यता हो, उन्हें ये खुद निशुल्क पढ़ाते है और अपने साथ ही रखते है और इनका खान पान करके इन्हें I.I.T. की परीक्षा देने के योग्य बनाते है। और इनकी ये 30 students की टोली बिहार जैसे कम संसाधन वाले स्थान में रह कर ही अपनी पढाई पूरी करते है। और वहा इन्हें “super 30” के नाम से जाना जाता।

आज से 10 साल पूर्व इन दोनों की पहल को रौशनी कुछ अंग्रेजो की टीम ने दी थी जिन्होंने इन दोनों को ले कर और इनके कुछ छात्रों की सहायता से एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी जिसमे इन छात्रों की मेहनत और पढ़ाई के पीछे की रूचि के साथ-साथ आनंद जी और अभयानंद जी के द्वारा किया गया परिश्रम और कर्मठता को दर्शाया था, और ये दिखाया था कि आनंद जी को इतनी जानलेवा धमकियां मिलने के बाद भी वो अपने इस नेक काम को करने में अडिग रहे। और आज इस documentary का second part भी आ चुका है। जिसमे दर्शाया गया है कि वो 10 साल पहले वाले छात्र I.I.T. से अपनी पढाई पूरी करके आज देश-विदेश की बड़ी-बड़ी संस्थाओं से जुड़ कर काम कर रहे है और अपने परिजनो का नाम रौशन कर रहे है और ये छात्र इन सब का श्रेय “सुपर 30” और इनके शिक्षकों को देते है। इसमें ये भी दिखाया है कि आज भी  Abhaynand ji,  Abhaayanand Super30, Rahmani 30 के माध्यम से बच्चों को पढ़ा रहे है। परंतु Anand ji इस संस्था से अलग हो चुके है। इसकी वजह किसी को भी आज तक पता नही चल पाई है और जब आनंद जी से इसके बारे में बात करने की कोशिश करी गई तो उन्होंने मना कर दिया।

Aljazeera द्वारा पब्लिश किया गया documentry आप यहाँ देख सकते है- Bihar’s Super 30: First step on the ladder

बात यही खत्म नही हुई यह बात तब और भी गंभीर बन गई जब भारतीय फ़िल्मी जगत के लोगो ने इस “सुपर 30” नामक विषय पर एक जीवनी चलचित्र (बायोपिक) बनाने का निर्णय लिया जो की एक निंदा का विषय बन गया, क्योंकि जब 10 साल पूर्व छोटी सी डॉक्यूमेंट्री बनाई गई थी तब अंग्रेजी टीम ने खुद भारत आकर इससे जुड़े तथ्यों को बटोर था और वो documentary बनाई थी। परंतु आज की ये biopic जो की एक बहुत बड़ी और गर्व वाली बात है तब इस योजना को बहुत ही मामूली सा विषय माना जा रहा है और इसे बनाने वाले बिना इसकी पूरी जानकारी के या बिना इससे जुड़े तथ्यों की जांच के इस विशाल से project को पूरा करने में लगे है। जबकि उन सब film-makers को सीख लेनी चाहिए की जब लोग दूर से आ कर पूरी जांच के साथ एक छोटी सी डोक्युमेंर्टी बना सकते है। तो हम अपने देश से जुडी इस नायाब सोच को एक सही राह क्यों प्रदान नही कर पा रहे है।और उस कमी को पूरा करे एक सत्यपूर्ण बायोपिक बनाए जिससे हमारे देश के छात्र-छात्राए एक नई उमंग से भर जाए। और बच्चे पढाई को और भी अच्छे से करे और इस देश के लोग को और भी गौरवान्वित करे।